रथवान - एक प्रेरक गीत

प्राख्यात कवि पण्डित नरेन्द्र शर्मा की तेजस्वी रचना सुनिये श्रीमती लावण्या शाह के मधुर स्वर में। अनाचार का प्रखर विरोध सतत करते हुए भी शिष्टता कैसे बनाये रखी जा सकती है, इसका अनन्य उदाहरण है उपरोक्त रचना।



रचना क्या पूरा जीवन दर्शन ही है।

शर्मा दम्पत्ति
रथवान

हम रथवान, ब्याहली रथ में,
रोको मत पथ में
हमें तुम, रोको मत पथ में।

माना, हम साथी जीवन के,
पर तुम तन के हो, हम मन के।
हरि समरथ में नहीं, तुम्हारी गति हैं मन्मथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।

श्रीमती लावण्या शाह
हम हरि के धन के रथ-वाहक,
तुम तस्कर, पर-धन के गाहक
हम हैं, परमारथ-पथ-गामी, तुम रत स्वारथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।

दूर पिया, अति आतुर दुलहन,
हमसे मत उलझो तुम इस क्षण।
अरथ न कुछ भी हाथ लगेगा, ऐसे अनरथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।

अनधिकार कर जतन थके तुम,
छाया भी पर छू न सके तुम!
सदा-स्वरूपा एक सदृश वह पथ के इति-अथ में!
हमें तुम, रोको मत पथ में।

शशिमुख पर घूँघट पट झीना
चितवन दिव्य-स्वप्न-लवलीना,
दरस-आस में बिन्धा हुआ मन-मोती है नथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।

हम रथवान ब्याहली रथ में,
हमें तुम, रोको मत पथ में।
--<>--

यदि किसी कारणवश आप इस रचना को सुन नहीं पा रहे हैं तो यहाँ से डाउनलोड कर लीजिये

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सम्बन्धित कड़ियाँ
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* लावण्या शाह - विकिपीडिया
* लावण्या शाह - कविता कोश
* पण्डित नरेन्द्र शर्मा - कविता कोश
* विविध भारती

19 comments:

  1. Harshad Jangla Says:

    Wonderful poem, nicely read.

    Byahalee means wedded..Right?

    -Harshad Jangla
    Atlanta, USA

  2. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन Says:

    हर्षद जी, आपकी बात सही है, यहाँ ब्याहली का शाब्दिक अर्थ विवाहिता ही है।

  3. विष्णु बैरागी Says:

    कहीं कोई तकनीकी चूक है। कैसे सुनें।

  4. Smart Indian - स्मार्ट इंडियन Says:

    विष्णु जी,
    यदि प्लेयर न दिखे तो अक्सर पेज को रिफ्रैश/रिलोड करने से वह दिखने लगता है. फिर भी काम न बने तो इस गीत को निम्न लिंक से डाउनलोड किया जा सकता है:
    http://www.divshare.com/download/14586334-6a4

  5. psingh Says:

    सुन्दर पोस्ट के लिए
    बधाई

  6. Patali-The-Village Says:

    सुन्दर पोस्ट के लिए धन्यवाद|

  7. Sawai SIingh Rajpurohit Says:

    सुन्दर पोस्ट

  8. मीनाक्षी Says:

    लावण्यादी की मीठी आवाज़ में पंडितजी का गीत बहुत मीठा लगा...आभार...

  9. बवाल Says:

    बहुत परमानंद दिला दिया सर। क्या कहना। हमें तुम रोको मत पथ में। वाह वाह।

  10. daanish Says:

    जीवन-मूल्यों और दर्शन से
    परिचित करवाते हुए शब्द
    गीत बन कर और भी मुखर हो उठे हैं
    और लावण्या जी की मधुर संगीतमय वाणी तो
    जैसे उनमें नव्प्रभाव संचारित कर रही है
    अभिनन्दन स्वीकार करें .

  11. एम सिंह Says:

    बेहद अच्छा ब्लॉग. सुन्दर गीत,,,, पढ़ने और सुनने को. धन्यवाद.

    आप मेरे ब्लॉग पर आये, धन्यवाद. आपने कहा की नक्शा गलत लगा दिया... पर मुझे लगता है की मैंने चीन का नक्शा ही लगाया है. उनका एक नक्शा विवादित भी है. हो सकता है वो लग गया हो. कोई त्रुटि है तो कृपया बताएं..

  12. दिगम्बर नासवा Says:

    लावण्या जी की मीठी आवाज़ ने इस इस मधुर रचना को जिस सहजता से बोला है उसकी कोई मिसाल ंहजी ... आपका आभार है इस रचना के ऑडियो के लिए ...

  13. saumy Says:

    शशिमुख पर घूँघट पट झीना
    चितवन दिव्य-स्वप्न-लवलीना,
    दरस-आस में बिन्धा हुआ मन-मोती है नथ में।
    हमें तुम, रोको मत पथ में।

    हम रथवान ब्याहली रथ में,
    हमें तुम, रोको मत पथ में।
    ek hi shabd hai adbhut .......

  14. लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` Says:

    आज मेरे पापा जी और अम्मा के चित्रोँ के साथ , आपने मुझे , आपके सुन्दर लेखन से परिपूर्ण ब्लॉग पर स्थान देकर जो और अपनेपन का एहसास दिलाया है उसे किन शब्दों मे कहूं ? आप मेरे छोटे भाई हो , परिवार के सदस्य की भांति आप को मेरी हर छोटी बात अच्छी लगती है बहुत बहुत आभार सभी टिप्पणी रखनेवाले आगंतुक महानुभावों व साथियों को तहेदिल से शुक्रिया - मेरी प्रतिक्रया देर से लिखने के लिए क्षमा चाहती हूँ बहुत स्नेह के साथ अनुराग भाई व उनके परिवार के लिए मेरी मंगल कामना तथा स्नेहाशिष
    - लावण्या

  15. Vivek Jain Says:

    सुन्दर पोस्ट
    आभार... विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

  16. ज्योति सिंह Says:

    दूर पिया, अति आतुर दुलहन,
    हमसे मत उलझो तुम इस क्षण।
    अरथ न कुछ भी हाथ लगेगा, ऐसे अनरथ में।
    हमें तुम, रोको मत पथ में।
    aaj doosri baar padhne aai hoon is rachna ko bahut sundar rachna

  17. priyadarshini Says:

    bahut khoob....aapke blog par comment post nhi ho pate...din-o lag jate hai.

  18. veerubhai Says:

    आभार आपका पंडित नरेंद्र शर्माजी का गीत ,साथ में संगीत ,सोने पे सुहागा ,जो न सुने निर्भागा .

  19. rajendra sharma'vivek" Says:

    suni achi lagi prerak kavitaa