मौसम आयेंगे जायेंगे - हुसैन बन्धु

पक्षियों के कलरव के बीच गुलाबी सर्दियों की गुनगुनी धूप में डैक पर बैठकर तसल्ली से हुसैन बन्धुओं को सुनना अपने आप में एक अलौकिक अनुभव है। आप भी सुनिये मेरा पसन्दीदा गीत, "मौसम आयेंगे जायेंगे":


मौसम के बदलते रंग! यदि आपको गीतकार के बारे में कुछ जानकारी हो तो कृपया साझा अवश्य करें, आभार!

मौसम आयेंगे जायेंगे, हम तुम को भूल ना पायेंगे, मौसम आयेंगे जायेंगे!

जाड़ो की बहार जब आएगी
धूप आँगन में लहरायेगी
गुल-दोपहरी मुस्कायेगी
शाम आ के चराग़ जलायेगी
जब रात बड़ी हो जायेगी
और दिन छोटे हो जायेंगे
हम तुम को भूल ना पायेंगे।

जब गर्मी के दिन आयेंगे
तपती दोपहरें लायेंगे
सन्नाटे शोर मचाएंगे
गलियों में धूल उड़ायेंगे
पत्ते पीले हो जायेंगे
जब फूल सभी मुरझायेंगे
हम तुम को भूल ना पायेंगे।

जब बरखा की रूत आएगी
हरयाली साथ में लायेगी
जब काली बदली छायेगी
कोयल मल्हारें गायेगी
इक याद हमें तड़पायेगी
दो नैना नीर बहायेंगे
हम तुम को भूल न पायेंगे।

मौसम आयेंगे जायेंगे, हम तुम को भूल ना पायेंगे, मौसम आयेंगे जायेंगे।

7 comments:

  1. गिरिजेश राव Says:

    सीधी सरल प्यारी सी रचना और उतनी ही उम्दा गायकी।
    धन्यवाद।

  2. नरेश सिह राठौड़ Says:

    बहुत ख़ूबसूरत गाजल है | इसके गीत कार का नाम हमें भी नहीं मालुम है जैसे ही पता चलता है आपको बताता हूँ |इन् के अन्य गीत सुनने है तो आपको मेरे ब्लॉग पर पधारना पडेगा |

  3. dhiru singh {धीरू सिंह} Says:

    आनंद आ गया .

  4. सतीश पंचम Says:

    आनंदम्...आनंदम्।

  5. गोरबंध Says:

    ये क़लाम मरहूम शायर "वाली आसी" का है...

  6. Krishan Vrihaspati Says:

    ये क़लाम मरहूम शायर "वाली आसी" का है...

  7. Krishan Vrihaspati Says:

    ये क़लाम मरहूम शायर "वाली आसी" का है...