नहीं जाना कुँवर जी - पीनाज़ मसानी

नहीं जाना कुँवर जी - पीनाज़ मसानी का स्वर
फ़िल्म: अमीर आदमी ग़रीब आदमी (1985)
शब्द: निदा फ़ाज़ली; संगीत राहुलदेव बर्मन


गायिका पीनाज़ मसानी
नहीं जाना कुँवर जी बजरिया में
कोई भर ले न तोहे नजरिया में
नहीं जाना कुँवर जी बजरिया में

छल बल दिखाके न कोई रिझाले
पल्लू गिराके न कोई बुलाले
निकला करो न अन्धेरे उजाले

लाखों सौतन फिरत हैं नगरिया में
कोई भर ले न तोहे नजरिया में
नहीं जाना कुँवर जी बजरिया में

बाहर से पायल बजा के बुलाऊँ
अंदर से बाहों की सांकल लगाऊँ
तुझको ही ओढूँ तुझी को बिछाऊँ

तोहे आंचल सा SSS
तोहे आंचल सा कस लूं कमरिया में
नहीं जाना कुँवर जी बजरिया में

तेरे उजालों को गालों में रक्खूं
हर पल तुझी को खयालों में रक्खूं
तोहे पानी सा भर लूं गगरिया में
नहीं जाना कुँवर जी बजरिया में

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इब्न ए इंशा के जन्मदिन पर

सब माया है, सब चलती फिरती छाया है
तेरे इश्क़ में हमने जो खोया है जो पाया है
जो तुमने कहा और फैज़ ने जो फरमाया है
सब माया है, सब माया है।


आधुनिक कवियों में इब्न-ए-इंशा की रचनायें मुझे बहुत प्रिय हैं। अगर आज वे ज़िन्दा होते तो मैं एक सवाल ज़रूर पूछता कि जिन्ना जैसा संकीर्ण और स्वार्थी राजनीतिज्ञ पाकिस्तान गया तो गया, इंशा जैसे कवि क्या सोचकर पाकिस्तान गये? रेडिओ पाकिस्तान की नौकरी? कारण जो भी हो, उनके इस व्यक्तिगत निर्णय से उनकी रचनाओं की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पडता। हिन्दी (या उर्दू) के इस महान रचनाकार का जन्म फिल्लौर (पंजाब) में 15 जून 1927 को हुआ था।


उन्होने काव्य और गद्य दोनों ही लिखे और खूब लिखे। उनकी भाषा अरबी फारसी से भरी हुई नक़ली और किताबी उर्दू न होकर अमीर खुसरो की हिन्दी और हिन्दवी की याद दिलाने वाली वह देशज उर्दू भाषा है जो हर उस व्यक्ति को सहज ही अपनी लगेगी जिसकी मातृभाषा उर्दू (या हिन्दी) है। इतनी मधुर और काव्यमयी उर्दू कि आपको लश्करी ज़ुबान का अक्खडपन ढूंढे नहीं मिलेगा।

इंशा का वास्तविक नाम शेर मुहम्मद खान था। उनकी रचनाओं में निम्न के नाम उल्लेखनीय हैं:
इस बस्ती के इक कूचे में - काव्य संग्रह
चान्द नगर - काव्य संग्रह
नगरी नगरी फिरा मुसाफिर - यात्रा संस्मरण
आवारागर्द की डायरी - यात्रा संस्मरण
खत इंशा जी के - पत्र संकलन
उर्दू की आखिरी किताब - हास्य व्यंग्य

इंशा जी का अंतकाल 11 जनवरी 1978 को हुआ।


सुनिये इंशा जी का गीत "ये बातें झूठी बातें हैं" गुलाम अली के स्वर में


इब्न-ए-इंशा का गीत "सब माया है" सलमान अलवी के स्वर में


इब्न-ए-इंशा की कहानी "बहादुर अल्लाह दित्ता" ज़िया मोहिउद्दीन की आवाज़ में
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